बुधवार, 27 मई 2020

यदि कोई स्त्री अपने पति से खुश नहीं होती है ,तो उस स्त्री को खुश करने में क्या बुराई है ?



यदि कोई स्त्री अपने पति से खुश नहीं होती है ,तो उस स्त्री को खुश करने में क्या बुराई है ?
आपके सवाल के दो पहलु है। 
          पहला ये की क्या आप सवाल का जवाब है में चाहते है आप चाहते है की लोग आपका समर्थन करे ?क्या आप किसी औरत के साथ इसलिए होना चाहते है क्योंकि वो अपने पति से दुखी है या फिर आप इसमें होने पिपासा को शांत करने का मौका देखते है।। 


अगर ऐसा है तो फिर उस औरत को बिलकुल अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने का हक है इस हालत में आप उस औरत का बिलकुल साथ दे सकते है और उससे शादी कर के उस औरत को सम्मान पूर्वक जिंदगी दे सकते है और अपने रिश्ते को भी सम्मानित नाम दे सकते है। 

दोनों परिस्थितियो में खुद को रखकर देख सकते है कि आप कौन सी परिस्थिति के करीब पाते है और उसके अनुसार सही फैसला लीजिये। 


।। एक अलग विचार -

  मैं एकदम सीधी बात बताता हु, एक स्प्रिंग होती है न आप उसको जितना दबाओगे ,वो उतना ही उल्टा आप पर आघात करेगी। 
बस यही स्त्री का मूल है वो अपनी ओर से कुछ नहीं करती।  हा अगर करने पर आ जाये तो , किसी पुरुष कि एक नहीं चलने देती। 

अगर आप किसी विवाहित स्त्री से खुले मन से और बिना धोके के शारीरिक सम्बन्ध बनाना चाहते है ,जरूर कीजिये।  क्या वो सेक्रेटे रहेगा ? मुझे नहीं पता। क्या उस बात का आप या उस औरत के जिंदगी में अच्छा असर होगा ?मई नहीं बता sakt। 

मई इतना बता सकता हूँ कि आपको ये सब करने से कोई निसर्ग का नियम नहीं रोकेगा ,लेकि इस मामले में ,स्त्री के सामने पुरुष जितना नंगा होकर सफाई दे ,जितना अपनी इच्छा वासना को कुबूल करे,उतना उन दोनों का रिश्ता पवित्र होता  जाता है। 

प्रेम के बिना कोई सम्बन्ध बनता ही नहीं ,भले प्रेम दिखाई न दे कहि भी ,लेकिन  केवल प्रेम से सम्बन्ध नहीं रहते ,सम्बन्ध बनते  और टिकते है वासना और पुराने जख्मो के व्यव्हार के चलते। 

पुरुष कि किसी पुराणी पीड़ा पर उसकी साथी महिला ने मरहम लगाया। धीरे धीर पुरुष भी उसके लिए कुछ खास करने कि सोचता है ,ये परमाण्विक व्यव्हार हर है ,लेनदेंन है ,मगर मिलावट नहीं है। 

अगर आप ऐसा व्यव्हार कायम कर सके और शरीर और मन की इच्छाओ को मार्ग दे सके ,तो ये नाजायज होने के बावजूद सूंदर हो सकता है। 
लेकिन जब जब मैं खुद ऐसे किसी विचार के दायरे में खुद को पता हूँ तो मेरी कसौटी यही होती है  कि अगर कोई लड़की या औरत अपने दोस्त या पैट को पीछे छोड़ ,उन्हें बिना बताये मेरे साथ आती है ,और मैं उस बात के मजे भी लेता हूँ तो किसी दिन उसकी इच्छा हुई कि मुझे छोड़ अपनी पति को पूरी ततः अपनाये ,या मुझे छोड़ किसी और के साथ जाये , तो तब मैं भी उसकी अपनी मर्ज़ी का साथ पाउँगा। 

व्यक्ति के तौर पर साथ जरूर दे पाउँगा ,लेकिन एक अपमानित पुरुष के तौर पर ,उस महिला का निर्णय बिलकुल जायज हो तब भी मुझे अपने दर्द के चलते केवल झगड़ा करने को मन करेगा ,ये एक हकीकत संभावना ह। 

माफ़ कीजिये ,लड़कियों को ब्लैकमेल करने वाले ऐसी दर्द के शिकार होते है। 


अब मुझे किसी भी व्यक्ति के किसी भी निर्णय या चुनाव में कोई आपत्ति नहीं है ,आपको तय ये करना है कि क्या आप विवेक के आधार पर आकर्षण से जित सकते है ? अगर हा ,तो वो ही ठीक है ,लेकिन अगर न ,तो फिर इस अवस्था में आपको क्या करना होगा ,इस बात का फैसला विवेक नहीं आकर्षण करेगा। 


एक और न्य विचार ऐड -
हर स्त्री प्रकृति का नायब अजूबा है ,उसकी नाखुशी का पैमाना ही नहीं है ,और न कोई उसका पैमाना बना सकता। वो पल में नैनोमिलिग्राम व पल में टन हो जाती है ,यह वो स्वयं  नहीं समझ सकती कि उसे कब ,किससे व् कितनी ख़ुशी कि अपेक्षा रहती है ,मिलती है या मिली।  जब कोई उसकी अपेछा पर खरा नहीं उतरता तो वह नाखुश रहने लगती है , जब उसकी नाख़ुशियो कि अम्बार लगा रहता है तो उसमे विस्फोट होता है जैसे रुई के गाठो के ढेर का फिसलना। उन उन गाठो के ढेर में कौन कब कैसे  दबा पड़ा है पता ही नहीं। 

जब सब तरह के नाटक करने के बाद उसकी अपेक्षाएं किसी भी तरह पूर्ण नहीं हो पाती ,तब वह निढाल होकर पहले चोरी चुपके रोती है व् अंत में समर्पण ही अंतिम शेष बचता है क्योकि नारी का पहला व् अंतिम आश्रय पति और परिवार ही होता है अन्य और कोई नहीं। 

नोट;-जरा ध्यान से ,

अपने पति से दुखी हुई स्त्री को खुश करने के चक्कर में कहि खुद कि पत्नी न दुखी हो जाये और फिर इस पत्नी को खुश करने का कोई और मन न बनाने लग जाये। 
कुछ लोग बड़े दयालु और बड़े दिलवाले होते है ,अपने घर के सुख को छोड़कर संसार के दुखियारों को ढूढ़ते है ,उनका दुःख हर लेने के बाद फिर दूसरी और तीसरी को ढूढते है वैसे तो संसार में बहुत या अनेको दुःख है लेकिन उनको हरने वाले बहुत काम लोग है ,लेकिन आश्चर्य कि बात ये है कि इस दुःख को हरने के लिए ज्यादातर लोग लाइन में लगे रहते है। 

इस तरह थक हार कर स्त्रियों का दुःख हर लेने के बाद ये बेचारे खुद दुखी हो जाते है और इनके दुःख को हरने वाला फिर कोई नहीं होता ,अपनी पत्नी भी नहीं क्योकि उसे भी ये मालूम हो जाता है कि ये मेरे को दुखी कर के ये औरो का दुःख देख रहे थे। 

एक दिन ऐसे लोग खुद अकेले पड़ जाते है। 


बात इतनी सी है कहानी में ,मारे गए जवानी मे। 

शनिवार, 23 मई 2020

लाइफ में खुश रहने के लिए हमें हमेशा क्या करना चाहिए ?

लाइफ में खुश रहने के लिए हमें हमेशा क्या करना चाहिए ?
लाइफ में खुश रहने के लिए हमें हमेशा क्या करना चाहिए ?

ऐसे तो लाइफ में सुख और दुःख दोनों का मेल है ,दुःख के बिना ख़ुशी का कोई मतलब नहीं। पर कुछ ऐसी चीजे है जिससे अनावश्यक तनाव से बचा जा सकता है जो की ख़ुशी जीवन जीने के लिए आवश्यक है -

१,अपने आप को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना 

२,पैसो की सेविंग्स पर ध्यान देना 

३, परिवार के साथ समय बिताना  

४,दुसरो के बातो को अधिक महत्व नहीं देना। 

५,अपने आप को जितना हो सके नशे से दूर रखना। 

६,कुछ समय के लिए व्यायाम या योग करना प्रतिदिन। 

७,सोशल मीडिया का लिमिटेड ही उपयोग करना। 

८,सोशल मीडिया के फेक न्यूज़ पैर अधिक ध्यान न देना। 

९,अगर छात्र हो तो gf /bf से अधिक अपने कॅरिअर पर फोकस करना। 

१०,सबसे महत्वपूर्ण हर दिन ,हर समय को खुल कर जीना। 

११,वर्तमान को खुशहाल बनाना चाहिए। 

१२,अपने पसंद का काम करना चाहिए। 

१३ सबको खुश रखने की कोशिश कभी नहीं करना चाहिए। 

१४ जीवव में कोई भी निर्णय लेने से पहले अच्छी तरीके से सोच लेना चाहिए। 

१५ लाइफ में खुश रहने के लिए हमेशा एक बात यद् रखना  चाहिए की खुद से ज्यादा कब्भी दुसरो पर भरोसा नहीं करना चाहिए। 

१६ जीवन में हमेशा एक दूसरे को समझने की कोशिश करना चाहिए परखने का नहीं। 

लोग हमारे बारे में क्या सोचते है ये हमे नहीं सोचना चाहिए। 

१७ लाइफ में खुश रहने के लिए जल्दी सो जाना चाहिए। 


                  एक अलग अंदाज में आप खुश रहने के लिए  कार (CAR) का प्रयोग कर सकते है जैसा की -


C का मतलब =लाइफ में उन चीजों को CHANGE करे जो की बदली जा सकती है और आपके लिए दुखदायी है मसलन कि अगर आप अपने अधिक वजन से दुखी है तो इस स्थिति को बदलिए। 

A का मतलब = बहुत सी चीजे जीवन में ऐसी है जो आप बदल नहीं सकते उन चीजों को ACCEPT कीजिये ,जैसे कि आप प्रदुषण और रोज़ ट्रैफिक जाम या फिर देश दुनिया कि हालातो को बदल नहीं सकते।  अतः बजाय कुढ़ते रहने के इन चीजों को स्वीकार कीजिये हुए इनसे प्रभावित न होईये। 

R का मतलब है =जो चीजे बिलकुल भी सहने लायक नहीं है वह से REMOVE हो जाईये हट जाईये क्योकि किसी जहरीले रिश्ते में रहने के बजाय उस दुःख देने वाली रिलेशनशिप से दूर हो जाईये। 

  इस प्रकार आप अपने जीवन में CAR को अपनाकर खुश रह सकते है। 

    दोस्तों यह पोस्ट कैसी लगी कमेंट कर के बताईये ,आप लोग कमेंट करते है तो मुझे ऐसी तरह के पोस्ट लिखने में मज़्ज़ा आता है ,आप हमारे पोस्ट पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो कीजिये। 



शुक्रवार, 22 मई 2020

शादीशुदा लोगो को किस बात का पछतावा सबसे ज्यादा होता है ?

 
शादीशुदा लोगो को किस बात का पछतावा सबसे ज्यादा होता है ?

मैं आपको मेरी कहानी बताता हूँ ,२५ वर्ष की उम्र होते ही मेरे घर वाले शादी के लिए दबाव बनाने लगे ,पूरा समाज अपना कर्तव्य  समझते हुए मेरे लिए लड़की ढूढ़ने में लग गया ,मैं अपना करियर बनाना चाहता था ,बहार रहकर आजादी के पंख लगाना चाहता था ,लेकिन घर वालो पर समाज का और मुझपर घरवालों का दबाव आने लगा मैंने घरवालों को समझाया की मेरे पास कोई अच्छी नौकरी नहीं है मैं अपनी बीवी की जिम्मेदारी नहीं संभल सकता तो उन्होंने मुझे कहा कि पापा कि नौकरी है ,हम है ना हम तुम दोनों कि जिम्मेदारी उठाएंगे तू आराम से तेरा कॅरिअर बना ,मैंने दूसरी बात कही कि आप शादी होते ही आप पोते   की मांग करोगे वो इसके लिए भी राजी हो गए ,कुछ लड़कियों के बाद मेरे गांव में ही एक अच्छी लड़की ढूढ़ कर उन्होंने मुझे दिखा दी ,हमने बात कि एक दूसरे को पसंद किये और लगभग फिर एक साल तक एक दूसरे से चुपके चुपके मिलते रहे ,तोहफे का आदान प्रदान होता रहा ,गांव कि सोच थोड़ी पुरानी होती है समाज कि आँखों में ये प्रेम वाली बात थोड़ी खटकने लगी ,अब वो इन बातो को लेकर ताने कसने लगी , मेरी मंगेतर भी थोड़ी दुःखी हुईं हम दोनों को शादी कि कोई जल्दी नहीं थी हमे तो आनंद आ रहा था ,घरवाले दोनों पक्ष हम पर दबाव बना रहे थे , तो मैंने शादी के लिए है कर  दी ,किस्मत से शादी के तुरंत बाद नौकरी भी मिल गयी ,लेकिन  घर वाले अपना एक लक्ष्य पूरा कर चुके थे वो अपना अगला लक्ष्य एक पोता चाहते थे जैसा कि वादा किया उससे मुकरते हुए उन लोगो कि दुहाई देने लगे जिनके बच्चे हो चुके थे ,पड़ोस कि आंटिया लड़की के गर्भधारण छमता पर संदेह करने लगी,समाज तो मुझे ऐसे घु रहा था जैसे मुझमे कोई कमी तो नहीं ,दोनों पक्षों के तरफ से मन्नतो का दौर चल पड़ा ,जबकि सही बात तो ये थी कि हम अभी अपना जीवन जीना चाहते थे करियर बनाना चाहते थे खैर मेरी बीवी कब तक ल्प्गों कि सुनती ,हमें बच्चे का प्लान करना पड़ा ,खुसी खुसी हमने घरवालों को पोता का तोहफा दिया ,घरवालों ने दबाव बनाकर एक और लक्ष्य पूरा कर लिया ,अब घरवालों ने न्य लक्ष्य बनाया है कि जल्दी मैं सरकारी नौकरी में लग जाऊ लेकिन शर्त ये है कि मुझे अपनी वर्तमान नौकरी करते हुए तैयारी करनी होगी ,ताकि उनपर मैं आर्थिक बोझ न बनाऊ ,जैसा कि उन्होंने हमारी जिम्मेदारी  सँभालने का वादा किया था वो मुक्कर चुके है ऐसा लगता है वो हम पर हस्ते हुए कह रहे हो कि हमने तो मुर्ख बनाया तुम ही बेवकूफ थे जो हम पर बिस्वास किया ,, सास बहु के झगड़ो का दौर चल पड़ा मम्मी-पापा अपना हर बात मनवाना चाहते है , आधी तनख्वाह घर पर देने के बावजूद ,बाकी कि आधे तनख्वाह के लिए मैं ताने सुनता हूँ ,मैं कुछ बोली तो इमोशनल ब्लैकमेल किया जाता है ,कई बार मैं और बीवी अकेले रोते है ,घूमने जाना छुट्टिया मानना मजे करना तो दूर कि बात है,और कभी कभार एक और बच्चे कि डिमांड उनके मुँह से निकल जाती है तो मेरे पास अब इतनी जिम्मेदारियां है -

।,अपनी बीवी को ख़ुश रखना 

२,अपने माता पिता को खुश रखना 

३,दोनों के झगड़ो को सुलझाना 

४, नौकरी भी करना 

५,पैसो के लिए अतिरिक्त भी काम करना 

६,अपने बच्चे के सामने हमेशा खुश रहना ताकि अच्छा संस्कार हासिल कर सके 

७,नई सरकारी नौकरी हासिल करना 

८,और हो सके तो इसके बाद घरवालों के दबाव में एक और बच्चा पैदा करना जो मैं कभी नहीं चाहता। 


                     मैं आपसे अंत में इतना ही कहना  चाहता हूँ कि आज्ञाकारी होना फालतू है,अपने समाज और माता पिता कि बातो में न आये ,उनके पास थोड़ी सम्पति है बाकी सब मात्र  आपसे अपेक्षाएं ही रखते है जो कभी ख़तम नहीं होती , अपनी विवेक से सोचे विरोध  करे और अपने दिमाग से काम ल। 

    जीवन यात्रा कैसी चल रही है कमेंट करके बताये।

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